अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति पिछले साल बहुत चर्चा में रही। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ने सत्ता में आने के बाद लगभग 7 देशों पर अलग‑अलग तरह के कदम उठाए। इनमें कुछ देशों पर सैन्य दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और राजनीतिक हस्तक्षेप शामिल था। इन कदमों का उद्देश्य अमेरिका के वैश्विक प्रभुत्व को बनाए रखना और देश के आर्थिक और सुरक्षा हितों की रक्षा करना था।विश्लेषकों का कहना है कि ट्रम्प की यह नीति सिर्फ अचानक किए गए फैसले नहीं थे। यह एक सोची‑समझी रणनीति थी, जिसमें अमेरिका की ताकत और प्रभाव को दुनिया में बढ़ाने का लक्ष्य था। ट्रम्प ने यह दिखाने की कोशिश की कि अमेरिका अब केवल अपने हितों के लिए सक्रिय होगा और किसी भी देश को कमजोर करने से पीछे नहीं हटेगा।

फोटो कर्टसी : हिंदुस्तान टाइम्स
फोटो कर्टसी : हिंदुस्तान टाइम्स

इस रणनीति की जड़ें 200 साल पुरानी अमेरिकी Monroe Doctrine में हैं। इस डोक्ट्रिन के अनुसार, अमेरिका ने कहा था कि पश्चिमी गोलार्ध में कोई बाहरी शक्ति हस्तक्षेप नहीं कर सकती। ट्रम्प की नीति को आधुनिक रूप में इसी सिद्धांत से जोड़ा जा रहा है। इसका मतलब है कि अमेरिका दुनिया के कई हिस्सों पर अपनी नजर रख रहा है और वहां के राजनीतिक और आर्थिक मामलों में असर डालने की कोशिश कर रहा है।ट्रम्प के कदमों से दुनिया भर में राजनीतिक और आर्थिक असर देखने को मिला। कुछ देशों में अमेरिकी प्रभाव बढ़ा, तो कुछ देशों में इसके विरोध और तनाव भी पैदा हुए। साथ ही, चीन और रूस जैसे शक्तिशाली देश भी अपनी रणनीति बदलने लगे।कुल मिलाकर, ट्रम्प की विदेश नीति केवल ‘सनक’ या अचानक किए गए फैसले नहीं थे, बल्कि अमेरिका को वैश्विक ताकत बनाए रखने और अपने हितों को मजबूत करने वाली एक रणनीति थी। इस नीति का असर आने वाले समय में दुनिया की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर और दिखेगा।

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